महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बोले- बागेश्वरधाम की शक्ति लोगों के कल्याण के लिए
शिवपुरी। नर्सरी ग्राउंड के विशाल परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर रविवार को आस्था का ऐसा अभूतपूर्व संगम दिखाई दिया, जिसने शिवपुरी के धार्मिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखे जाने योग्य अध्याय जोड़ दिया। बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य सान्निध्य में लगी भीड़ किसी महाकुंभ से कम नहीं थी। लाखों की संख्या में पहुँचे भक्तों ने भक्ति, भाव और विश्वास से भरे इस आध्यात्मिक समागम को अविस्मरणीय बना दिया।
श्रीबागेश्वरधाम सरकार ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि बागेश्वरधाम के रूप में हमें जो शक्ति मिली है, वह दादाजी की कृपा और हनुमानजी का वरदान है। यह शक्ति हम किसी चमत्कार के लिए नहीं, बल्कि लोगों के भले, सुख, समृद्धि और स्वस्थ राष्ट्र निर्माण के लिए उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय के मन में हिंदुत्व का गौरव जागेगा तभी भारत सच्चे अर्थों में हिंदू राष्ट्र कहलाएगा। दिव्य दरबार की शुरुआत होते ही आस्था का प्रवाह चरम पर था। पंडित शास्त्री ने अपनी पोटली से श्रीहनुमानजी का पवित्र गदा और प्राचीन श्रीकाले हनुमान के चरणों के दर्शन कराए। दरबार में छोटे-बड़े, युवा-वृद्ध, पहली बार आए श्रद्धालु सभी की अर्जियाँ लगीं। पिपरिया, देवरी, शिवपुरी और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की समस्याओं का संज्ञान लेकर उन्हें राहत, उपाय और बालाजी की कृपा का सहज मार्ग बताया गया। किसी को बीमारी से आराम मिलने का आश्वासन मिला, किसी को ग्रह पीड़ा से मुक्ति का संकेत, तो किसी की पारिवारिक अशांति का समाधान बताया गया। प्रेतराज सरकार का आह्वान कर पंडित शास्त्री ने मंच से ही अनेक लोगों की प्रेत बाधाएँ, ऊपरी शक्तियों और तंत्र-मंत्र के प्रभावों को दूर किया। लगभग 20 मिनट तक अखंड हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, चमीटा की मार और विशेष मंत्रोच्चारण विधि से दर्जनों श्रद्धालुओं की पीड़ा शांत हुई। नकारात्मक शक्तियों को शुद्ध करने हेतु उकेरा कराया गया और अभिमंत्रित नारियल भक्तों को प्रदान किए गए। कथा के यजमान श्रीमती ऊषा-रामप्रकाश गुप्ता, श्रीमती शिल्पी-कपिल गुप्ता (कपिल मोटर्स) परिवार ने पूज्य गुरुदेव को भावभीनी विदाई दी और गुरु चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। परिवार ने घोषणा की कि जो भी श्रीबागेश्वरधाम से जुडऩा चाहता है, वह दुव्र्यसनों का त्याग अवश्य करे, तभी धाम की कृपा सहज प्राप्त होगी। विशाल 65 बीघा में फैला कथा स्थल मानव सागर में बदल गया था। जहाँ भक्ति की तरंगें, मंत्रोच्चारण की ध्वनि और श्रद्धा का वातावरण एक दिव्य संसार रच रहा था। शिवपुरी ने इस दिन न केवल कथा सुनी, बल्कि बागेश्वरधाम की दिव्य अनुभूति को अपने हृदय में उतार लिया।

