जनजातीय शिल्पकार नामिका मेले में बूड़ाढोंगर की महिलाओं के जैकेट ने खींचा ध्यान, स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग पर जोर
शिवपुरी। जनजातीय महिलाओं के हुनर को यदि बड़ा बाजार मिले तो उनकी मेहनत न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बनेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान भी मिल सकेगी। इसी उद्देश्य को लेकर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने शुक्रवार को मानस भवन में आयोजित जनजातीय शिल्पकार नामिका मेले का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्व-सहायता समूहों से जुड़ी जनजातीय महिलाओं के स्टॉलों पर पहुंचकर उनके उत्पाद देखे और उनसे सीधा संवाद किया।
कलेक्टर वर्मा ने विभिन्न विकासखंडों और गांवों से आई महिला शिल्पकारों के हुनर की सराहना करते हुए ट्राइफेड प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं, जिससे इन महिलाओं की आय बढऩे के साथ उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। मेले में बदरवास विकासखंड के बूड़ाढोंगर की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए जैकेट विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कलेक्टर ने इन जैकेटों की गुणवत्ता और निर्माण कौशल की सराहना करते हुए मौके पर ही ट्राइफेड के सहायक प्रबंधक पी.एम. खदाने एवं जी.के. रजक से इनके बड़े स्तर पर विपणन की संभावनाओं पर चर्चा की। मेले में महिलाओं ने सरसों एवं मूंगफली का शुद्ध तेल, खजूर की झाड़ू, सूखा आंवला, मक्का, पौष्टिक दलिया, पारंपरिक बरी-पापड़ और हस्तनिर्मित सामग्री प्रदर्शित की। राजकुमारी आदिवासी द्वारा तैयार पारंपरिक डलियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोगी जड़ी-बूटियों का प्रदर्शन भी किया गया। कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन महिलाओं के उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग में हरसंभव सहयोग करेगा। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ विजय राज, ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. अरविंद भार्गव सहित अन्य अधिकारी, नागरिक एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मौजूद रहीं।


