जीवन को स्वर्ग बनाने के लिए श्वांस और वाणी पर नियंत्रण आवश्यक : साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी

MP DARPAN
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धर्मसभा में साध्वी रमणीक कुंवर जी ने आचार्य विजयधर्म सूरि जी की समाधि भूमि पर गुरूकुल शुभारंभ की अपेक्षा की


शिवपुरी।
यह त्रासदी है कि व्यर्थ की बातों में हम जीवन के अनमोल क्षण गवां देते हैं। अपने जीवन को स्वर्ग या नर्क बनाना हमारे हाथ में है। परमात्मा ने हमें श्वांस की पूंजी और वाणी के पुदगल दिए हैं। इन्हें संभालना आवश्यक है। जीवन को स्वर्ग बनाने के लिए श्वांस और वाणी पर नियंत्रण आवश्यक है। लम्बी श्वास लेने और धीरे-धीरे छोडऩे से जहां उम्र बढ़ती है वहीं गुस्से पर भी नियंत्रण होता है जबकि तौल-तौल कर बोलने से दूसरों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनते हैं वहीं वाणी भी सिद्ध होती है। उक्त प्रेरणास्पद उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने आचार्य विजयधर्म सूरि जी की समाधि भूमि पर धर्मप्रेमियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। धर्मसभा में गुरूणी मैया श्री रमणीक कुंवर जी म.सा. ने समाधि मंदिर के ट्रस्टी मंगलचंद भंसाली से अपेक्षा की कि इस धर्म क्षेत्र का इतिहास पुन: दोहराया जाए और यहां पूर्व की तरह गुरूकुल का निर्माण हो जिससे देश, विदेश के विद्वान जैन संस्कृति से परिचित होकर इसका प्रचार प्रसार कर सकें। 

धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि आचार्य विजयधर्म सूरि जी की समाधि भूमि से हम शिवपुरी में अपनी चातुर्मास यात्रा का शुभारंभ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरू की महिमा अपरंपार होती है। गुरू वह महत्वपूर्ण कड़ी हैं जो हमें भगवान और धर्म से अवगत और परिचित कराते हैं। गुरूपूर्णिमा से ही चातुर्मास का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास काल जीवन के आध्यात्मिक उत्थान के लिए होता है। साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने कहा कि चातुर्मास काल में हमें मोक्ष के चार मार्ग ज्ञान, श्रद्धा, आचरण और तप को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोक्ष के चार द्वार दान, शील, तप और भाव हैं। चातुर्मास काल में अधिक से अधिक दान करें, शील व्रत का पालन करें, अधिक से अधिक तप कर अपनी आत्मा को परिमर्जित करें और उच्च श्रेणी के भाव रखें। मोक्ष के चार मार्ग और चार द्वार को अपने जीवन में आत्मसात कर हम चातुर्मास को यादगार बना सकते हैं। धर्म के मार्ग पर आपको अग्रसर करने के लिए हम यहां आए हैं और आपके मन में जो भी धर्म के प्रति जिज्ञासा, सवाल हों आप हमसे नि:संकोच पूछ सकते हैं। साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने कहा कि आज श्रावक मुकेश जैन और धर्मचंद्र छाजेड़ दोनों के विवाह दिवस के उपलक्ष्य में नवकार महामंत्र का जाप और भक्तांवर पाठ तथा धर्मसभा का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर हम यही कामना कर सकते हैं कि आपका वैवाहित जीवन आगामी वर्षों में देवगुरू और धर्म के प्रति समर्पित हो। प्रारंभ में साध्वी जय श्रीजी ने अंतर में समाधि में जीना है, प्रभु महावीर के अमृत को पीना है के सुमधुर भजन का गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। धर्मसभा में साध्वी पूनम श्रीजी भी उपस्थित थीं।

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