श्रीमद् भागवत कथा : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर जमकर झूमे श्रद्धालु

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नारायणी माता उत्सव समिति द्वारा चल रही श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का हुआ वर्णन 


शिवपुरी।
शहर के बीच नाई कि बगिया में स्थित नारायणी माता मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा में चौथे दिन कथा व्यास पं. श्री कृष्ण पाठक जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाईयां दी गई, एक-दूसरे को खिलौने और मिठाईयां बाटी गई। कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में भक्तों ने भजन प्रदुम कर भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई।

वहीं कथावाचक पं. श्री कृष्ण पाठक जी महाराज ने साथ में वर्णन किया समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य का हृदय संसार का सागर है और मनुष्य के अच्छे और बुरे विचारों का मंथन देवता और दानव करते हैं। कभी-कभी हमारे भीतर अच्छे विचारों का मंथन होता रहता है। ऐसा चलता रहता है और कभी-कभी हमारे अंदर बुरे विचारों का मंथन चलता रहता है। और इन अच्छे और बुरे विचारों के मंथन में जब हमारे अच्छे विचार जीत जाते हैं तो हमें समझ लेना चाहिए कि हमारे अंदर का ईश्वर जीत गया है और हमें अमृत मिल गया है। गया । बुरे विचारों की जीत राक्षसों की जीत और अगर हमारे अंदर के बुरे विचार जीत गए तो समझ लेना चाहिए कि हमारे अंदर का राक्षस जीत गया है और हलाहल विष प्राप्त हो गया है। महाराज श्री ने बताया कि जिसके अंदर का राक्षस जीत गया उसका जीवन दु:खी, परेशान और कष्टों और कठिनाइयों से भरा होगा। जिसके भीतर का ईश्वर जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और ईश्वरीय प्रेम से भरपूर होगा। इसलिए सदैव अपने विचारों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और अच्छे विचारों से बुरे विचारों पर विजय प्राप्त करके अपने मानव जीवन को सुखी और आनंदमय बनाना चाहिए। प्रवचन अवसर पर मुख्य यजमान नारायणी माता उत्सव समिति के सदस्य भगवान दास सेन, गिर्राज सेन और देवेंद्र सेन, नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष नवनीत सेन, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष विवेक उपाध्याय, विकसित सेन (तरुण), अर्पण शर्मा, सहित  समस्त सैन समाज एवं भक्तजन मौजूद रहे।

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