तीन विकासखंडों के स्कूलों में औचक निरीक्षण, भोजन की गुणवत्ता से लेकर स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था तक परखी
शिवपुरी। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन में लापरवाही बरतने वाले समूहों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण) के तहत भोजन वितरण में अनियमितता करने वाले समूहों को बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे समूहों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी। इसी क्रम में योजना की प्रभारी अधिकारी सीमा उपाध्याय ने जिले के विभिन्न विकासखंडों के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर भोजन व्यवस्था की हकीकत परखी।
नौ से अधिक विद्यालयों की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान करैरा, पिछोर और खनियाधाना विकासखंड के विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, नियमित वितरण, रसोईघर की स्वच्छता और विद्यार्थियों के लिए पेयजल की उपलब्धता का बारीकी से परीक्षण किया गया। करैरा विकासखंड में शासकीय एकीकृत प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला सिरसौद तथा शासकीय प्राथमिक विद्यालय टोडा का निरीक्षण किया गया। इसी तरह पिछोर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय भौंती और शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा में व्यवस्थाएं देखी गईं। वहीं खनियाधाना विकासखंड के शासकीय एकीकृत शाला श्रीनगर, शासकीय एकीकृत शाला एवं शासकीय प्राथमिक विद्यालय मानपुरा तथा एकीकृत शासकीय माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय गजोरा का निरीक्षण किया गया।
जहां मिली कमी, वहां तत्काल सुधार के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिन विद्यालयों में भोजन व्यवस्था अथवा साफ-सफाई से संबंधित कमियां सामने आईं, वहां जिम्मेदारों को तत्काल सुधार करने और शासन के निर्धारित मापदंडों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। जिन विद्यालयों में व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, वहां उन्हें लगातार बनाए रखने की हिदायत दी गई।
बच्चों की सेहत से समझौता नहीं
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को निर्धारित मीनू के अनुसार प्रतिदिन ताजा, स्वच्छ और गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। भोजन तैयार करने से लेकर वितरण तक स्वच्छता बनाए रखने, रसोईघर की नियमित सफाई और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देशों के अनुरूप विद्यालय प्रबंधन और भोजन संचालित करने वाले समूहों को चेताया गया है कि योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का जोर है कि मध्याह्न भोजन योजना का लाभ प्रत्येक विद्यार्थी तक नियमित रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण तथा स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता न हो।



