कोरोना फाईटरों को सलाम : जान की परवाह किए बिना घर-घर पहुंचा रहे हैं अखबार

MP DARPAN
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शिवपुरी। कोरोना वायरस से जहां पूरी दुनिया में हा-हाकार मचा है। वहीं अखबार का वितरण कर अपना जीवन यापन करने वाले यह कर्मयोगी अपनी जान की परवाह किए बिना शहर की खबरें आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसे कोरोना फाईटरों को हमारा सलाम.....। अखबार वितरक अपने फर्ज को पूरा करने के लिए जान हथेली पर रखकर आपके घरों तक पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें यह भी मलाल नहीं कि उनकी जान तक खतरे में पड़ सकती है और वह भी कोरोना जैसी महामारी की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे ही हमारे कार्यालय में कार्यरत कुछ कर्मयोगियों की बात हम समाचार पत्र के माध्यम से आप तक पहुंचा रहे हैं। 
कोरोना फाईटर आनंद जाटव का कहना है कि जहां शहर में लॉकडाउन है और लोग डरे हुए हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में भी अपने कर्तव्य से डिगा नहीं हूं और अपनी जान की परवाह किए बिना मैं हर गली और मोहल्ले में अखबार का वितरण कर रहा हूं। जहां कई लोग अखबार लेने से इसलिए मना कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अखबार से कोरोना वायरस फैल रहा है। लेकिन फिर मैं ऐसे लोगों को समझाता हूं कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें। अखबार से आपकों देश-विदेश और शहर की जानकारी मिलती है। वहीं कुछ  लोग मेरा उत्साहवर्धन भी करते हैं जिससे मुझे नई ऊर्जा मिलती है। मेरे इस कार्य में मेरे परिवार के लोग भी सहयोग करते हैं। 
कोरोना फाईटर निखिल नामदेव कहते हैं कि मेरी हमेशा यह सोच रहती है कि अपनी जिम्मेदारी का मैं ईमानदारी के साथ पालन करू । सामान्य दिनों में किसी भी मौसम में मैंने अखबार का वितरण नहीं रोका। लेकिन इस समय देश पर भारी संकट आन पड़ा है। ऐसी संकट की घड़ी में मेरा छोटा सा प्रयास यह है कि मैं अपने कर्म से पीछे नहीं हटा और शहर में कफ्र्यू लगने के दौरान भी मेरे द्वारा घर-घर अखबार पहुंचाए जा रहे हैं। जिससे शहर के हालातों से लोग बाकिव हो रहे हैं। 
कोरोना फाईटर केपी परिहार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दिन के जनता कफ्र्यू को छोड़कर शेष सभी दिनों में मैं अपनी जान की परवाह किए बिना ही अखबारों का वितरण पूर्णत: ईमानदारी के साथ कर रहा हूं और आगे भी करता रहंूगा। मुझे ईश्वर पर भरोसा है कि देश पर आई यह विपात्ति जल्द ही दूर हो जाएगी और जीवन पूर्व की तरह निरंतर चलता रहेगा। 
कोरोना फाईटर धर्मेंद्र बाथम (दैनिक सांध्य तरूण सत्ता समाचार पत्र के प्रसार प्रभारी) का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी दोगुनी है। एक तो इस भीषण आपदा के दौरान अखबार वितरण करने वाले वितरकों को एक जुट रखना और दूसरा समय पर अखबार का निकलना और इसके बाद शहरवासियों तक पहुंचना वह इस जिम्मेदारी को संकटकाल में भी पूरी कर रहे हैं। उनके द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि पाठकों तक नियमित रूप से समाचार पत्र पहुंच रहा है या नहीं। शाम के समय वह दैनिक सांध्य तरूण सत्ता के प्रसार का पूरा अवलोकन करते हैं और सुबह वह स्वयं अखबारों का वितरण कर देश की सेवा करने में लगे हुए हैं। 
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