पिछोर (नीरज गुप्ता)। पिछोर नगर के ऐतिहासिक और बहुउपयोगी मोतीसागर तालाब की वर्षों से चली आ रही उपेक्षा आखिरकार अब सुर्खियों में है। नगर का यह प्रमुख जलस्रोत लंबे समय तक जलकुंभी, कचरे और गंदगी के भारी दबाव में अपनी पहचान खोता नजर आ रहा था। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि तालाब का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया था। स्थानीय नागरिकों ने लगातार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद से तालाब की सफाई और संरक्षण की मांग उठाई। कई बार आवेदन दिए गए, शिकायतें दर्ज हुईं, सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में भी मुद्दा जोर-शोर से उठा, लेकिन लंबे समय तक जिम्मेदार तंत्र ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अब काफी समय बाद प्रशासन ने मोतीसागर तालाब की सफाई का कार्य शुरू कराया है, जिससे नगरवासियों में उम्मीद की किरण जगी है। सफाई अभियान के चलते तालाब के पुनर्जीवन की संभावना बन रही है। यदि यह कार्य नियमित और योजनाबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो यह जलस्रोत फिर से नगर की शोभा बन सकता है। यह तालाब न केवल जल संरक्षण का आधार बनेगा, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए भी जीवनदायी साबित होगा। हालांकि, लोगों के मन में अब भी यही सवाल है कि क्या यह सफाई स्थायी बदलाव लाएगी या फिर एक बार फिर कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी?


