शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका में पिछले एक वर्ष से चल रहा राजनीतिक घमासान अब भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर भाजपा की नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनके ही दल के एक दर्जन से अधिक पार्षद मोर्चा खोले हुए हैं, तो दूसरी ओर पार्टी न तो अध्यक्ष के खिलाफ कोई ठोस निर्णय ले पा रही है और न ही बागी पार्षदों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर पा रही है।
स्थिति तब और अधिक चर्चा में आ गई जब मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के शिवपुरी दौरे से ठीक पहले भाजपा के असंतुष्ट पार्षदों ने नगर में रैली निकालकर नपाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने बागी पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा, लेकिन पार्षदों ने नोटिस का जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वे पहले ही अपने इस्तीफे प्रदेश नेतृत्व को सौंप चुके हैं। नगर पालिका के 39 सदस्यों में से 20 से अधिक पार्षद लंबे समय से अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। पार्षदों ने प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी थी। जांच के बाद संबंधित प्रतिवेदन नगरीय प्रशासन विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी कारण असंतोष लगातार बढ़ता गया। असंतुष्ट पार्षद कई बार कलेक्टर, प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मिल चुके हैं। भोपाल में प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी उन्होंने मुलाकात कर स्पष्ट कहा कि या तो अध्यक्ष को हटाया जाए या उनके इस्तीफे स्वीकार किए जाएं। वहीं केंद्रीय मंत्री सिंधिया से भी पार्षदों की चर्चा हुई, लेकिन समाधान नहीं निकलने से नाराजगी बरकरार रही। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और जिला नेतृत्व ने पार्षदों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रहे। बाद में प्रशासन ने भी उन्हें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में प्रवेश नहीं करने दिया। इधर, भाजपा नेतृत्व की दुविधा साफ दिखाई दे रही है। यदि बागी पार्षदों पर कार्रवाई होती है तो नगर पालिका की राजनीतिक स्थिति बदल सकती है, जबकि अध्यक्ष के खिलाफ कदम उठाने से अलग संदेश जाएगा। इसी असमंजस में पूरा विवाद लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।
इधर नई रणनीति भी तैयार
बागी पार्षदों ने नवनियुक्त सीएमओ यशवंत राठौर से मुलाकात कर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता देने की मांग रखी। साथ ही तय किया कि वे जिलाध्यक्ष के नोटिस का जवाब नहीं देंगे और जल्द ही भोपाल पहुंचकर प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से अंतिम दौर की चर्चा करेंगे। यदि वहां भी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।


