संविधान में एक और संशोधन कर भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करो: महंत धीरेन्द्र शास्त्री

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पत्रकारवार्ता में बागेश्वर धाम के महंत ने हिन्दू जनजागरण की आवश्यकता पर दिया बल


शिवपुरी।
संविधान में अभी तक सवा सौ संशोधन हो चुके हैं। अब संविधान में एक और संशोधन कर भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहिए उक्त उदगार देश के प्रसिद्ध संत और बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र शास्त्री ने करैरा के रामराजा गार्डन में आयोजित पत्रकारवार्ता में व्यक्त किए। पत्रकारवार्ता में संत धीरेन्द्र शास्त्री ने खुलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के इस कथन से सहमति व्यक्त की कि प्रत्येक हिन्दू को दो से अधिक संतान पैदा करना चाहिए। बकौल शास्त्री, कम संतान पैदा करने से हमारे मामा, मौसी, ताई, चाचा, चाची, ताऊ, बुआ, फूफा आदि के रिश्ते समाप्त होते जा रहे हैं और हम अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं।

पत्रकार वार्ता में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि इस भारत भूमि पर जिसने भी जन्म लिया है वह हिन्दू है। भले ही आज वह ईसाई अथवा मुस्लमान है लेकिन उनके पूर्वज हिन्दू रहे हैं। उन्हें अब अपनी जड़ों की ओर लौट आना चाहिए। संत शास्त्री ने कहा कि हिन्दू संस्कृति उदार संस्कृति है और इसमें सभी को समाहित करने की भावना है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि गैर हिन्दू कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह हिन्दुओं को जागृत करने का काम कर रहे हैं। निश्चित रूप से इस समय जातिवाद और भेदभाव के कारण हिन्दू संस्कृति बदनाम हो रही है लेकिन मैं जातिवाद और भेदभाव समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोडूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे देश में एक करोड़ कट्टर हिन्दुओं की आवश्यकता है। जिससे लोगों के विचारों में परिवर्तन आए और सनातन के प्रति उनकी आस्था मजबूत हो। उन से जब एक पत्रकार ने पूछा की शंकराचार्य जी का कहना है कि महंत धीरेन्द्र शास्त्री राजनैतिक नेताओं के हाथों में खेल रहे हैं तो इस पर हंसते हुए उन्होंने जवाब दिया कि मैं अपने परिवार के इशारे पर नहीं चलता। मुझ पर लगा यह आरोप गलत है। जहां तक शंकराचार्य जी का सवाल है तो वे मेरे आदर के पात्र हैं और सनातन संस्कृति के आचार्य है। उनके प्रति मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। संत धीरेन्द्र शास्त्री से पूछा गया कि आजादी के पूर्व देश में हुए चुनाव में 90 प्रतिशत हिन्दू सीटों पर कांग्रेस और 90 प्रतिशत मुस्लिम सीटों पर मुस्लिम लीग ने चुनाव जीता था। उस चुनाव में सांम्प्रदायिक धु्रवीकरण के आधार पर लोगों ने वोट दिया था तो उस समय हिन्दू राष्ट्र भारत को घोषित न करना एक गलती थी? इसके जवाब में धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि उस समय में पैदा नहीं हुआ था इसलिए कुछ नहीं कह सकता। मैं राजनीति में भी नहीं पडऩा चाहता। लेकिन यदि मैने जन्म लिया होता तो हिन्दू राष्ट्र की मांग अवश्य उठाता। वॉलीबुड में हिन्दू विरोधी फिल्म के चलन पर संत धीरेन्द्र शास्त्री ने कड़ी प्रति क्रिया व्यक्त की और कहा कि फिल्म निर्माताओं में यदि साहस है तो वह अन्य धर्मों के विरूद्ध फिल्म बनाकर दिखाऐं। श्री शास्त्री से पूछा गया कि यदि भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित हुआ तो क्या उसमें आरक्षण होगा इस पर उन्होंने जवाब दिया कि आरक्षण के मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कहंूगा। हिन्दू राष्ट्र एक विचार है और आरक्षण का मुद्दा राजनीति से जुड़ा हुआ है।

पूरा विश्व बांग्लादेश में हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचार का विरोध करे

संत धीरेन्द्र शास्त्री ने बांग्लादेश में हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचार का विरोध किया और कहा कि इस अत्याचार के विरोध में बंगलादेश के हिन्दुओं को सड़क पर आना चाहिए और पूरा देश तथा समूचे विश्व को उनका साथ देना चाहिए। श्री शास्त्री ने कहा कि यदि बंगलादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार को रोकने में वहां की सरकार विफल हो रही है तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। संत शास्त्री ने पाकिस्तान में हिन्दुओं की दशा पर भी गंभीर चिंता  व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजादी के समय पाकिस्तान में 22 प्रतिशत हिन्दू थे लेकिन आज यह संख्या घटकर मात्र 2 प्रतिशत रह गई है। जबकि हमारे देश में अल्पसंख्यक खूब फल फूल रहे हैं। पाकिस्तान को भारत से प्रेरणा लेना चाहिए कि किस तरह से अल्पसंख्यकों के साथ समानता और भाईचारे का व्यवहार किया जाता है।

करैरा में 251 कन्याओं का होगा विवाह

करैरा में भागवत कथा करने आए बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र शास्त्री ने बताया कि करैरा में 6 दिसम्बर को 251 कन्याओं का नि:शुल्क विवाह होगा जिनमें 108 आदिवासी कन्यायें हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में जातपात और भेदभाव को समाप्त करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ है।

हरमंदिर साहब मेरे प्रेरणास्त्रोत है: शास्त्री

सिख समाज से जुड़े श्री परवाना द्वारा संत धीरेन्द्र शास्त्री को जान से मारने की धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संत धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि श्री परवाना साहब को मेरी बात समझने में भूल हुई है। मैने हरमंदिर साहब के सम्मान में कुछ भी नहीं कहा है। हरमंदिर साहब, गुरूगोविन्द सिंह और नवें गुरू तेगबहादुर मेरे आदर्श और प्रेरणास्त्रोत है। मेरा कथन संभल उ.प्र. में हरिहर मंदिर के विषय में था।

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