शिवपुरी। खरीफ सीजन में सोयाबीन फसल महत्वपूर्ण वृद्धि अवस्था में पहुंच चुकी है। ऐसे में फसल पर रोग और कीटों के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को नियमित खेत निरीक्षण और समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने कृषि अमले को किसानों के लगातार संपर्क में रहकर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए हैं।
उपसंचालक कृषि मुनेश $कमार शाक्य ने बताया कि राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर की साप्ताहिक सलाह के अनुसार रोग एवं कीटों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। वर्तमान में सोयाबीन में एन्थ्रेक्नोज, राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट और पीला मोजेक जैसे रोगों के साथ तंबाकू की इल्ली, सेमीलूपर, चने की इल्ली, बिहार हेरी कैटरपिलर, गर्डल बीटल, तना मक्खी और सफेद मक्खी पर विशेष निगरानी जरूरी है। पीला मोजेक से प्रभावित पौधों को प्रारंभिक अवस्था में खेत से निकालकर नष्ट करने तथा सफेद मक्खी जैसे वाहक कीटों का नियंत्रण करने की सलाह दी गई है। पत्ती खाने वाली इल्लियों और अन्य कीटों का प्रकोप मिलने पर कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में ही प्रयोग किया जाए। गर्डल बीटल से प्रभावित पौधों और कटे हिस्सों को भी खेत से हटाकर नष्ट करने की सलाह है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि बिना आवश्यकता कृषि रसायनों का छिड़काव न करें। दवा का प्रयोग रोग या कीट की सही पहचान के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही करें। समस्या होने पर कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय से संपर्क करें।


