शिवपुरी। बारिश का मौसम जहां खेतों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं शिवपुरी के कई गांवों में यह मौसम ग्रामीणों के लिए अंतिम संस्कार तक की चुनौती बन जाता है। मुक्तिधाम और शेड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को बारिश के बीच खुले में अपनों को अंतिम विदाई देनी पड़ रही है। जिले के दो गांवों की तस्वीरें ग्रामीण सुविधाओं की जमीनी हकीकत सामने ला रही हैं।
श्यामपुरा में नदी किनारे जली चिता
पोहरी जनपद की ग्राम पंचायत डिगडोली के श्यामपुरा गांव में बुधवार को 62 वर्षीय गणेशा कुशवाह का निधन हो गया। गांव में मुक्तिधाम या शेड नहीं होने के कारण परिजनों को नदी किनारे खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ा। बारिश से लकडिय़ां गीली होने के कारण चिता जलाना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने लकडिय़ों में डीजल डालकर किसी तरह चिता को अग्नि दी। ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में उन्हें इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है।
हाथरस में टेंट-तिरपाल के नीचे अंतिम विदाई
करैरा जनपद की ग्राम पंचायत जुझाई के हाथरस गांव में 90 वर्षीय रजिया लोधी पत्नी सुन्ना लोधी के निधन पर परिजनों ने बारिश से बचने के लिए किराए का टेंट लगवाया और ऊपर तिरपाल डाला। ग्रामीणों के मुताबिक जुझाई में मुक्तिधाम हैं, लेकिन हाथरस अब तक इस सुविधा से वंचित है। ग्राम पंचायत जुझाई की सरपंच अंगूरी जगदीश कोली ने बताया कि मुक्तिधाम के लिए सरकारी जमीन है, लेकिन उस पर कब्जा होने के कारण निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने जल्द कब्जा हटाकर मुक्तिधाम निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही। सवाल यह है कि जब जिंदगी के बाद भी सम्मानजनक विदाई के लिए ग्रामीणों को बारिश और अव्यवस्था से जूझना पड़े, तो गांवों के विकास की तस्वीर कितनी पूरी है?


