कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन: टीआई के ट्रांसफर से 1 करोड़ मुआवजे तक 7 मांगें, करैरा टीआई छावई ने सभी आरोपों को बताया निराधार

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शिवपुरी। सोमवार को अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। कलेक्ट्रेट परिसर नारेबाजी से गूंज उठा जब वकीलों ने करैरा थाना प्रभारी विनोद छावाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तत्काल ट्रांसफर और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। टीआई के खिलाफ नारों के बीच उन पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो सीनियर एडवोकेट संजय सक्सेना की जान बच सकती थी। यह विरोध 14 फरवरी को करैरा में हुई अधिवक्ता संजय सक्सेना की गोली मारकर हत्या के बाद तेज हुआ है। 

शिवपुरी जिला बार एसोसिएशन और करैरा बार एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से 7 सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, एक सदस्य को शासकीय नौकरी, परिवार को सुरक्षा, शेष आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रदेश में तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना शामिल है। वहीं वकीलों ने करैरा कोर्ट में स्थायी पुलिस सुरक्षा, गार्ड तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षित चैंबर, कोर्ट टाइमिंग में ट्रैफिक नियंत्रण और हेल्पलाइन वाहन की व्यवस्था की भी मांग की। आरोप लगाया गया कि पूर्व में सुरक्षा का आश्वासन दिया गया, लेकिन न्यायालय परिसर में गार्ड तैनात नहीं मिले। करैरा में अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 20 फरवरी तक न्यायालयीन कार्य बंद रहेगा। शोकसभा के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। 

करैरा टीआई विनोद छावई ने आरोपों को बताया निराधार

करैरा थाना प्रभारी विनोद छावई ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि मगरौनी लूट प्रकरण में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर माल बरामद कर सजा दिलाई गई। थार गाड़ी के मुद्दे पर उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी विधायक या उनके रिश्तेदार के नाम पर वाहन हो तो प्रमाण प्रस्तुत करें। साथ ही स्पष्ट किया कि वकील या उनके परिजनों द्वारा थाने में कोई आवेदन नहीं दिया गया। सीसीटीवी फुटेज से स'चाई सामने आ जाएगी। इस प्रकार के आरोपों से पुलिस की छवि धूमिल करना अनुचित है।

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