पिछोर (नीरज गुप्ता)। एनएच–27 हाइवे के पास सिंध नदी पर स्थित डेम इन दिनों गर्मी शुरू होते ही सूखकर खाली नजर आने लगता है। जबकि बरसात के समय यह डेम पानी से लबालब भरा रहता है और क्षेत्र की जल आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास के कुछ किसान अपने निजी लाभ के लिए डेम का पानी समय से पहले ही निकाल लेते हैं।
बताया जाता है कि पानी कम होते ही डेम के अंदर खाली पड़ी जमीन पर मूंगफली, उड़द, मूंग, चिमरी और तरबूज जैसी फसलों की खेती शुरू कर दी जाती है। इससे डेम का जल स्तर तेजी से घट जाता है और जल संरक्षण का उद्देश्य प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि विद्युत विभाग और सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण कुछ लोग डेम क्षेत्र पर धीरे-धीरे कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से डेम क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने, अवैध पानी निकासी पर रोक लगाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।


