दरअसल, रिट याचिका क्रमांक 7460/2010 रामप्रताप सिंह भदौरिया एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन में पारित आदेश दिनांक 3 जनवरी 2018 का लंबे समय तक पालन नहीं हो सका। इसके चलते अवमानना याचिका क्रमांक 1842/2018 दायर की गई। इस प्रकरण में विभाग की ओर से शिवपुरी सीएमएचओ को संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया था, जिनकी जिम्मेदारी न्यायालय में समय पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करना था।
20 अप्रैल की डेडलाइन भी चूके, कोर्ट सख्त
उच्च न्यायालय ने 23 मार्च 2026 को स्पष्ट निर्देश देते हुए 20 अप्रैल 2026 तक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होने पर संबंधित अनावेदक के खिलाफ आरोप तय कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद 20 अप्रैल तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, जिससे न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर भी यदि अनुपालन सुनिश्चित नहीं हुआ, तो संबंधित पक्षकार/अनावेदक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा और उनके विरुद्ध आरोप तय कर कार्रवाई की जाएगी। इस स्थिति ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
लापरवाही मानी गई कदाचार, नियमों का उल्लंघन
विभागीय जांच में पाया गया कि संपर्क अधिकारी होने के बावजूद डॉ. ऋषीश्वर ने समय पर समुचित कार्रवाई नहीं की। इससे प्रकरण में अनावश्यक विलंब हुआ और शासन की छवि भी प्रभावित हुई। इसे कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और स्वेच्छाचारिता मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के उल्लंघन की श्रेणी में कदाचार माना गया। इसी आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत डॉ. संजय ऋषीश्वर को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, ग्वालियर संभाग निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।



