माधव चौक पर पंढरपुरी चाय के पास सजी झांकियां बनीं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
शिवपुरी। श्री गजकर्णक सेवा समिति, शिवपुरी द्वारा माधव चौक चौराहे पर पंढरपुरी चाय के पास गणेश उत्सव के दौरान प्रतिदिन धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकियां सजाई जा रही हैं। समिति की ओर से प्रस्तुत की जा रही इन झांकियों में भगवान श्री गणेश, भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीहरि की दिव्य लीलाओं को जीवंत स्वरूप दिया गया है। झांकियों को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
प्रथम झांकी : भगवान गणेश ने किया दैत्य सिंधुरासुर का वध
प्रथम झांकी में भगवान श्री गणेश द्वारा दैत्य सिंधुरासुर के वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पौराणिक कथा के अनुसार सिंधुरासुर अपने बल और अत्याचार से देवताओं तथा ऋषि-मुनियों को परेशान करने लगा था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान श्री गणेश ने दैत्य का सामना किया और उसका अंत किया। झांकी में भगवान गणेश के पराक्रम और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश प्रभावी ढंग से दिखाया गया।
दूसरी झांकी : रावण और सीता माता का संवाद
दूसरी झांकी में लंका की अशोक वाटिका से जुड़ा रावण और माता सीता के बीच संवाद का प्रसंग दिखाया गया। रावण ने माता सीता को भय और प्रलोभन के माध्यम से अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। माता सीता ने उसके सभी प्रस्तावों को ठुकराते हुए भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अटूट निष्ठा कायम रखी। झांकी ने सत्य, नारी शक्ति और धर्म के प्रति अडिग रहने का संदेश दिया।
तीसरी झांकी : क्षीर सागर में भगवान श्रीहरि का शयन
तीसरी झांकी में क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर भगवान श्रीहरि विष्णु के शयन का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया। भगवान विष्णु को क्षीर सागर में योगनिद्रा में विराजमान दिखाया गया, जहां देवी लक्ष्मी उनकी सेवा करती दिखाई गईं। यह दृश्य सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु के दिव्य एवं शांत स्वरूप को दर्शाता है। झांकी की सजावट और दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
चौथी झांकी : भगवान श्रीकृष्ण का महारास
चौथी झांकी में भगवान श्रीकृष्ण की वृंदावन लीला और महारास को जीवंत रूप दिया गया। महारास में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के बीच प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक समर्पण का भाव प्रस्तुत किया गया। झांकी में वृंदावन की भक्ति और श्रीकृष्ण की मोहक लीलाओं को आकर्षक रूप में सजाया गया। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य प्रसंग के दर्शन कर भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
पांचवीं झांकी : केवट ने कराई प्रभु श्रीराम को गंगा पार
पांचवीं झांकी में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के दौरान केवट द्वारा गंगा पार कराने का प्रसंग दिखाया गया। भगवान श्रीराम के गंगा तट पर पहुंचने पर केवट ने प्रभु के चरण धोकर उन्हें नाव में बैठाया। केवट की निश्छल भक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति उसका प्रेम इस प्रसंग का मुख्य आकर्षण रहा। झांकी ने भक्ति में जाति, पद और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समर्पण का संदेश दिया।
छठी झांकी : भगवान गणेश का सिर काटे जाने का प्रसंग
छठी झांकी में माता पार्वती के आदेश का पालन करते हुए द्वार पर पहरा दे रहे बाल गणेश और भगवान शिव के बीच हुए प्रसंग को प्रस्तुत किया गया। भगवान शिव को रोकने पर दोनों के बीच युद्ध हुआ और भगवान शिव ने क्रोधित होकर गणेश का सिर काट दिया। इसके बाद माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश को हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवन प्रदान किया। इसी प्रसंग के बाद भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में प्रतिष्ठा मिलने की कथा जुड़ी है।
धार्मिक प्रसंगों की जीवंत प्रस्तुति ने बढ़ाया आकर्षण
श्री गजकर्णक सेवा समिति द्वारा तैयार की गई इन झांकियों में पौराणिक कथाओं को दृश्य रूप देकर श्रद्धालुओं तक उनके धार्मिक और नैतिक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। माधव चौक पर पंढरपुरी चाय के पास सजाई गई झांकियां शाम होते ही श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।


