पीएम जनमन योजना से बदली सहरिया परिवारों की जिंदगी, सबके बन रहे पक्के घर

MP DARPAN
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आवास देखने के लिए आसपास के गाँव के लोगों की भीड़ उमड़ी


शिवपुरी।
जनकल्याण के काम करने की लगत हो, तो कम समय में भी लोगों की जिंदगी तेजी से बदली जा सकती है। इसका जीवंत उदाहरण है प्रधानमंत्री जन मन योजना है। जिसके तहत झोपडिय़ों में रह रहे गरीब सहरिया परिवारों की जिंदगी बदल रही है और सबके पक्के घर बन रहे हैं। देश के पीएम नरेंद्र मोदी अंतिम छोर के व्यक्ति का भी उत्थान चाहते हैं। उन्हें अपने काम पर किस हद तक भरोसा हैं इसे मोदी की गारंटी से जोड़कर देखा जा सकता है। अब तक अनेक योजनाएं देश में लागू की जा चुकी हैं, उसी क्रम में बीती 15 जनवरी 2024 को देश में एक साथ 1 लाख से अधिक जनमन आवास स्वीकृत हुए थे। मध्य प्रदेश में देश का पहला जन-मन आवास 29 दिनों में बनकर तैयार हुआ वो भी मप्र के शिवपुरी जिले में भागचंद्र आदिवासी का जन-मन आवास बनकर तैयार हो गया था। कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी एवं जनपद सीईओ गिर्राज शर्मा की विशेष रुचि के चलते इस दिशा में योजनाबद्ध कार्य हुआ। अब इसी योजना के अंतर्गत पोहरी जनपद में भी 2 हजार आवास स्वीकृत किये गए हैं। पोहरी की मडख़ेड़ा पंचायत में 43 आवास स्वीकृत हुए अति पिछड़ी जनजाति सहरिया लोगो के लिए। इस समुदाय के लोग अन्य कस्बों, जिलों में जाकर मजदूरी करते हैंद्ध आवास निर्माण, सामग्री सस्ते दामों एवं अच्छी गुणवत्ता की उपलब्ध करवाना कठिन होता हैं। इतने सारे कारीगर, सेंट्रिंग की उपलब्धता बहुत कम थी ऐसे में आवास निर्माण किया जाना बड़ा चैलेंज था, लेकिन ये सब आसानी से संभव हो सका। इस पंचायत की सचिव श्रीमती सकुन धाकड़ और जीआरएस मोहम्मद शरीक खान की बदौलत। मडख़ेड़ा पंचायत में कुल 43 आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 18 आवास पूर्ण हो चुके हैं एवं बांकी के 18 छत पूर्ण कर चुके हैं। 4 आवास पर सेंट्रिंग लग गई है। जो 18 आवास पूर्ण हुए हैं वो बाकई देखने लायक हैं शौचालय, किचन के अतिरिक्त एक हॉल की सुविधा है। घर में आंगन भी बनाया गया है जो देखने लायक है। इन आवासों को देखने आसपास की पंचायतो के लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं क्योंकि यह बहुत खूबसूरत बने हैं। उन्होंने बताया कि हमें सहरिया हितग्राहियों के आवास सबसे सुन्दर और सबसे जल्दी बनवाना है। सबसे पहले कियोस्क और बैंक की मदद से इनके छोटे खाते यानि जनधन खाते से पूरी राशि धीरे-धीरे आहरित करवाई, फिर आसपड़ोस की पंचायतों से कारीगर बुलवाये एडवांस में ही छत ढलाई के लिए सेंट्रिंग की व्यवस्था करवाई। इसके अतिरिक्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई। प्रतिदिन अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर सचिव सकुन धाकड़ ने गंभीरता से इन आवासों की मॉनिटरिंग की। ये देश की अकेली पंचायत है जिसमें सबसे ज्यादा 18 आवास अभी तक पूर्ण किये जा चुके हैं। बड़े बड़े जिले और राज्य भी जो कारनामा नहीं कर सके वो इस पंचायत ने किया है। 

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