जल संकट के निराकरण के लिए नपाध्यक्ष मैदान में उतरी तो उनके विरोधी पार्षद सड़कों पर आए

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जल संकट के लिए एक दूसरे को ठहराया दोषी

शिवपुरी। सिंध जलावर्धन योजना के बाबजूद भी पिछले कई दिनों से शहरवासी जल संकट से बुरी तरह से जूझ रहे थे। इसकी हकीकत जानने जब नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के नेतृत्व में प्रशासन और पार्षदों का दल सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट पर पहुंचा तो स्पष्ट हो गया कि शहर में पानी क्यों नहीं पहुंच रहा। सतनवाड़ा से खूबत घाटी तक मैनलाइन से प्रभावशाली लोगों ने अवैध रूप से कनेक्शन ले लिए थे और वह धड़ल्ले से खेती कर रहे थे। कई स्थानों पर जल के फैलाब ने तालाब का रूप धारण कर लिया था और जिसमें 10-10 हॉर्सपावर की मोटरें डालकर खेती की जा रही थी। कई होटल बालों ने भी अवैध रूप से कनेक्शन ले रखे थे। जिसके कारण शहर तक सिंध का जल नहीं पहुंच पा रहा था। इसके बाद नपाध्यक्ष ने रात्रि 1 बजे जल सप्लाई शुरू करार्ई और सोचा की अब तो शहर की पानी की टंकियां भर जाएगी और जल सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन फिजीकल संपबैल में ऐसा नहीं हुआ। बताया जाता है कि वहां के पंप अटैडर टंकी भरने के स्थान पर डायरेक्ट पेयजल सप्लाई कर रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा और पार्षद पति राजू बाथम मौके पर पहुंचे और वह पंप अटेंडर को गाड़ी में डालकर सीएमओ के यहां ले गए, लेकिन पंप अटेंडर और उसके समर्थकों ने आरोप लगाया कि नपाध्यक्ष, पार्षद पति और नपाध्यक्ष के ड्रायवर ने उसके साथ मारपीट की है तथा उसे बंधक बनाया गया है। इसके बाद पंप अटेंडर सड़कों पर उतर आए। इस पूरे मामले में नपाध्यक्ष विरोधी एक दर्जन पार्षदों ने मोर्चा संभाल लिया और इस पूरे घटनाक्रम के लिए नपाध्यक्ष को दोषी ठहराकर उनके खिलाफ एफआईआर की मांग की। इस विवाद के कारण शहर में पेयजल की सप्लाई प्रभावित हुई। परंतु नपाध्यक्ष ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मैं तो शहर की जनता के हित में जल संकट के निराकरण के लिए लड़ रही हूं। जनता की लड़ाई में कुछ बाधाएं तो आएंगी। 

शहर में पानी न आने देने के दोषियों के खिलाफ कार्यवाही हो: नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि शहर में जल संकट के लिए जो भी जिम्मेदार हैं उसके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में जल संकट कृत्रिम रूप से पैदा किया जा रहा है। ओम कंस्ट्रक्शन की जिम्मेदारी हैं कि वह सतनवाड़ा से शिवपुरी तक पेट्रोलिंग करे कि कोई अवैध कनेक्शन तो नहीं है, लेकिन उक्त कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया और करीब तीन दर्जन कर्मचारी दर्ज हैं। यही कारण रहा कि प्रभावशाली लोगों ने मैन लाइन में अवैध रूप से कनेक्शन लेकर 10-10 हॉर्सपावर की मोटरें लगाकर जल सप्लाई में बाधा उत्पन्न की। जिससे शहर में जल संकट पैदा हुआ। उन्होंने जल की चोरी करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। 

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