प्रतिबंधित जमीनों के अवैध सौदों पर कलेक्टर का शिकंजा, 5 साल के रिकॉर्ड खंगालने के आदेश

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शिवपुरी। जिले में प्रतिबंधित एवं शासन प्रदत्त भूमि के अवैध क्रय-विक्रय और नामांतरण पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने मंगलवार को आयोजित बैठक में उप पंजीयकों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि का बिना सक्षम अनुमति पंजीयन या नामांतरण किसी भी स्थिति में न किया जाए।

कलेक्टर ने कहा कि अहस्तांतरणीय भूमि, पट्टे की भूमि, भूदान भूमि और शासन द्वारा आवंटित जमीनों के अवैध हस्तांतरण से सरकारी हितों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए अब प्रत्येक दस्तावेज की गहन जांच होगी। बिना कलेक्टर या सक्षम अधिकारी की अनुमति के प्रतिबंधित भूमि के सौदों को वैध नहीं माना जाएगा। प्रशासन ने नामांतरण प्रक्रिया को भी सख्त करते हुए निर्देश दिए हैं कि भूमि की प्रकृति, खसरा रिकॉर्ड, अनुमति पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण किए बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। केवल रजिस्ट्री के आधार पर नामांतरण नहीं होगा, बल्कि हस्तांतरण की वैधानिकता भी परखी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया है कि पिछले पांच वर्षों में प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि से जुड़े सभी नामांतरण प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में सक्षम अनुमति नहीं मिलेगी, उनकी अलग से जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर न्यायालय को भेजी जाएगी। कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन या नामांतरण पाया गया तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी। दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रतिकूल प्रविष्टि और दायित्व निर्धारण जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती को भूमि माफियाओं और अवैध सौदों में संलिप्त लोगों के खिलाफ बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे जिले में जमीनों के फर्जी हस्तांतरण और विवादित नामांतरण पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।

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