नवजात को फेंकना नहीं, प्रशासन को सौंपें, 50 परिवार गोद लेने को तैयार, बाल संरक्षण विभाग की भावुक अपील

MP DARPAN
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शिवपुरी। पोहरी क्षेत्र में 30 जून को मिले नवजात शिशु को गोद लेने के लिए 50 से अधिक नि:संतान परिवारों द्वारा संपर्क किए जाने के बाद जिला बाल संरक्षण विभाग ने भावुक अपील जारी की है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी कारणवश कोई परिवार नवजात का पालन-पोषण नहीं कर सकता, तो उसे सुनसान जगह पर छोडऩे या फेंकने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रशासन को सुरक्षित समर्पित करें।

बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि नवजात को असुरक्षित स्थान पर छोडऩा अमानवीय होने के साथ गंभीर अपराध भी है। उन्होंने कहा कि जो बच्चा किसी के लिए बोझ बन जाता है, वही किसी नि:संतान दंपति के जीवन की सबसे बड़ी खुशी बन सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्रसव केंद्रों को शिशु स्वागत केंद्र बनाया गया है, जहां नवजात को पूरी गोपनीयता के साथ समर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण कार्यालय और जिला अस्पताल स्थित पालना गृह के माध्यम से भी बच्चे का सुरक्षित समर्पण किया जा सकता है। राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि समर्पण के बाद 60 दिनों तक नियमानुसार बच्चे को वापस लेने का अधिकार रहता है। इसके बाद उसे विधिक प्रक्रिया के तहत दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नवजात को फेंकना या उसके जीवन को खतरे में डालना किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत गंभीर अपराध है, जिसमें 7 वर्ष तक की सजा और 1 लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। विभाग ने स्पष्ट किया कि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया केवल ऑनलाइन और वैधानिक माध्यम से ही मान्य है।

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