पिछोर में बदमाश बेखौफ, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिवपुरी। पिछोर कस्बे में मंगलवार रात कानून-व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई, जब वार्ड क्रमांक-5 में एक युवक का खुलेआम कट्टे की नोक पर अपहरण कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, इसके बावजूद बदमाश बेखौफ होकर युवक को जबरन कार में डालकर ले गए और पुलिस मौके पर नहीं पहुंच सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छवेंद्र ठाकुर अपने घर के बाहर अन्य लोगों के साथ आग ताप रहा था। तभी एक स्कॉर्पियो कार मौके पर आकर रुकी। कार से चार बदमाश उतरे और बिना किसी डर के छवेंद्र को पकड़ लिया। बदमाशों ने कट्टा तानते हुए उसे जबरन कार में बैठाया। छवेंद्र के साथ मौजूद दो लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने उन्हें धक्का देकर हटा दिया और कार लेकर फरार हो गए।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह घटना रिहायशी इलाके में हुई, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे। फुटेज में पूरी घटना साफ दिखाई दे रही है, फिर भी बदमाशों में पुलिस का कोई भय नजर नहीं आया। इससे साफ जाहिर होता है कि पिछोर क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस की गश्त व निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और सीसीटीवी फुटेज भी सौंपा। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर घेराबंदी की बात कही, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि पुलिस की सक्रियता प्रभावी होती, तो बदमाश युवक को घंटों तक बंधक बनाकर नहीं रख पाते। पुलिस दबाव का दावा करने के बावजूद आरोपी कुछ घंटे बाद छवेंद्र को छोड़कर फरार हो गए, जो पुलिस की कार्रवाई पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। पीडि़त छवेंद्र ठाकुर ने बयान में बताया कि उसका अपहरण विजय पाल, जितेंद्र, रहीश और एक अन्य व्यक्ति ने किया और इसके पीछे चुनावी रंजिश कारण थी। यह दर्शाता है कि क्षेत्र में राजनीतिक और चुनावी रंजिश के मामलों को पुलिस पहले से गंभीरता से नहीं ले रही थी। इस घटना ने पिछोर की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। खुलेआम अपहरण, हथियारों का प्रदर्शन और घंटों तक आरोपियों का फरार रहना यह साबित करता है कि अपराधियों पर पुलिस का नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है। अब देखना होगा कि पुलिस केवल जांच के नाम पर औपचारिकता निभाती है या आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर क्षेत्र में विश्वास बहाल करती है।


