अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सीएसपी शिवपुरी के मार्गदर्शन में 23 जनवरी को थाना फिजीकल पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि टी.वी. टॉवर रोड स्थित प्रियदर्शनी कॉलोनी एवं झांसी रोड तिराहा भारत गैस एजेंसी के पास अवैध रूप से मैट्रीमोनियल कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सूचना की तस्दीक के बाद पुलिस टीम ने दोनों स्थानों पर एक साथ दबिश दी। दबिश के दौरान यूनिक रिश्ते डॉट कॉम एवं शादी मैचिंग डॉट कॉम नामक मैट्रीमोनियल साइट्स के माध्यम से कॉल सेंटर संचालित करते हुए आरोपी रंगे हाथों पकड़े गए। पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर का स्टाफ फर्जी प्रोफाइल बनाकर स्वयं को महिला बताकर ग्राहकों से बातचीत करता था और उन्हें शादी का प्रलोभन देकर क्यूआर कोड व बैंक खातों के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाता था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन देवेश बरैया, निशा राजे, आरती शर्मा, हर्षित यादव, मंजू यादव तथा संचालक विवेक जैन एवं अमित जैन द्वारा किया जा रहा था। मौके से मैट्रीमोनियल साइट संचालन में प्रयुक्त कंप्यूटर, मोबाइल फोन, रजिस्टर एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। पुलिस ने मौके पर मिले आरोपी मंजू यादव, हर्षित यादव एवं देवेश बरैया को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की तथा धारा 35(3) बीएनएसएस के तहत नोटिस तामील कर माननीय न्यायालय में उपस्थित होने के लिए पाबंद किया। प्रकरण में अपराध क्रमांक 13/26 धारा 318(4), 319(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। इस कार्रवाई में निरीक्षक नम्रता भदौरिया, उप निरीक्षक नारायण सिंह, प्रधान आरक्षक अंकित सिंह, महिला प्रधान आरक्षक भानमती सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही।
पत्रकारों के मोबाइल छीने जाने का मामला, पुलिस पर गंभीर आरोप
फिजिकल थाना पुलिस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। आरोप है कि शादी के नाम पर ठगी करने वाली कथित लुटेरी दुल्हन गैंग के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस ने न केवल संदिग्ध युवतियों को कथित तौर पर सेटिंग कर छोड़ दिया, बल्कि सच्चाई सामने लाने पहुंचे पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी की। सूत्रों के अनुसार, थाने में कार्रवाई की रिकॉर्डिंग कर रहे पत्रकारों के मोबाइल पुलिसकर्मियों ने जबरन छीन लिए और उनमें मौजूद वीडियो व फोटो डिलीट करवा दिए। पत्रकारों का कहना है कि यह कदम सबूत मिटाने और पूरे मामले को दबाने के उद्देश्य से उठाया गया। इस घटना से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला और कथित लेन-देन की चर्चाओं ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।


