माधव नेशनल पार्क भ्रमण में सैकड़ों छात्र हुए वन्य जीवन से रूबरू
प्रतियोगिताओं में बच्चों ने दिखाया पर्यावरणीय दृष्टिकोण
शिवपुरी। वन्य जीव और वन्य प्राणियों से बच्चों को परिचित कराना ही अनुभूति कार्यक्रम का मूल उद्देश्य है, ताकि वे प्रकृति को समझें और समाज में संरक्षण का संदेश फैलाएं। उक्त उद्गार वन परिक्षेत्र कोलारस के रेंजर गोपाल सिंह ने मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के सहयोग से आयोजित अनुभूति कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
कोलारस वन परिक्षेत्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सांदीपनि विद्यालय एवं शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोलारस के करीब 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों को माधव नेशनल पार्क का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने जॉर्ज कैसल की कोठी से लेकर पूरे वन क्षेत्र की गतिविधियों, जैव विविधता और वन्य प्राणियों के जीवन चक्र को नजदीक से समझा। भ्रमण के दौरान बच्चों ने नीलगाय, हिरण, बंदर, मगरमच्छ सहित अन्य वन्य जीवों को देखा और उनके संरक्षण से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। मॉडल स्कूल के छात्र शिवम कोली ने बताया कि उन्हें ट्रैक मार्गों, वन प्रबंधन और नेशनल पार्क की संरचना की विस्तृत जानकारी मिली। वहीं छात्रा कृष्णा प्रजापति और प्रेम दांगी ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और वन्य जीवों की सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। दोपहर भोजन के बाद द्वितीय सत्र में तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक विषयों पर बच्चों ने आत्मविश्वास से भाषण दिए। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पूनम दांगी, द्वितीय स्थान मनीषा कुशवाह और तृतीय स्थान अवनि राजन ने प्राप्त किया। विजेता व प्रतिभागियों को रेंजर गोपाल सिंह, शिक्षकों एवं मीडिया से राजू यादव ग्वाल द्वारा प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की सफलता पर रेंजर गोपाल सिंह ने कहा कि अनुभूति कार्यक्रम बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करने का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में सांदीपनि विद्यालय से शिक्षक हरिशंकर मथेनिया, नीरज श्रीवास्तव, नीरज कुमार खरे, राघवेन्द्र सिंह लोधी, श्रीमती डिम्पलपुरी एवं कुं. बुलबुल सेन तथा मॉडल स्कूल से दीपक भार्गव, अजय भार्गव, श्रीमती प्रियंका भदौरिया, राजेन्द्र कुशवाह और श्रीमती वंदना शिवहरे उपस्थित रहे। अंत में डिप्टी रेंजर रुकमणी भगत ने आभार व्यक्त किया।


