शिवपुरी। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर इंडियन इंस्ट्यिूट ऑफ होम्योपैथिक फिजिशियन शिवपुरी द्वारा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रमोद बिंदल के निवास महल कॉलोनी स्थित बृजधाम में संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में होम्योपैथी के जनक सैमुअल हैनिमैनकी जयंती पर उनके जीवन और चिकित्सा सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
हर वर्ग के लिए सुरक्षित है होम्योपैथी : डॉ. प्रमोद बिंदल
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रमोद बिंदल ने कहा कि होम्योपैथी एक सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जिसकी आदत नहीं पड़ती और यह गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि यह चिकित्सा शरीर की वाइटल फोर्स को मजबूत कर रोग को जड़ से खत्म करने पर काम करती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा होम्योपैथी का उपयोग : डॉ. गोपाल दंडोतिया
आईआईएचपी जिला अध्यक्ष डॉ. गोपाल दंडोतिया ने बताया कि होम्योपैथी की शुरुआत 18वीं सदी में जर्मनी में हुई थी और आज यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी चिकित्सा पद्धति बन चुकी है। भारत इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष की थीम दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी रखी गई है।
बीमारी की जड़ पर काम करती है होम्योपैथी : डॉ. राकेश राठौर
जिला उपाध्यक्ष डॉ. राकेश राठौर ने बताया कि होम्योपैथी में रोग के मूल कारण पर उपचार किया जाता है। इसमें तीन प्रमुख मियाज्म शोरा, सिफलिस और साइकोसिस के आधार पर उपचार किया जाता है, जिससे बीमारी को स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।
दुष्प्रभाव रहित और प्रभावी चिकित्सा : डॉ. नृपेंद्र रघुवंशी
जिला सचिव डॉ. नृपेंद्र रघुवंशी ने बताया कि होम्योपैथी पूरी तरह सुरक्षित है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते। उन्होंने लोगों से भ्रांतियों से दूर रहकर इस पद्धति को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में डॉ. वीरेंद्र वर्मा, डॉ. रामकुमार गुप्ता सहित शहर के कई होम्योपैथिक चिकित्सक उपस्थित रहे।


