शिवपुरी। वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार 79 प्रशिक्षु वनरक्षकों ने छह माह का कठोर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। वन विद्यालय शिवपुरी में आयोजित वनरक्षक प्रशिक्षण सत्र123 के दीक्षांत समारोह में सभी सफल प्रशिक्षणार्थियों को भविष्य में निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ सेवा करने का संदेश दिया गया। वनसंरक्षक आदर्श श्रीवास्तव के मार्गदर्शन तथा वन विद्यालय संचालक सुधांशु यादव एवं अनुदेशक आदित्य शांडिल्य के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माधव टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम शर्मा रहे। समारोह की शुरुआत आकर्षक पासिंग आउट परेड से हुई, जिसमें परेड कमांडर वीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में चार प्लाटूनों ने अनुशासन, दक्षता और प्रशिक्षण का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कठोर प्रशिक्षण से निखरी क्षमता
1 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुए छह माह के प्रशिक्षण में वनरक्षकों को शारीरिक एवं व्यावसायिक दक्षता विकसित करने के लिए पीटी, परेड, योग, खेलकूद, शस्त्र प्रशिक्षण और 15 दिवसीय अध्ययन भ्रमण कराया गया। इसके अलावा आईटीबीपी आरटीसी करैरा में विशेष क्षमता विकास प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों ने जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस परेड में निशस्त्र वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर संस्थान का गौरव बढ़ाया।
अनुराधा और अजय बने सर्वश्रेष्ठ
प्रशिक्षण अवधि में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कु. अनुराधा चौहान (वनमंडल देवास) को सम्मानित किया गया। वहीं 9 किलोमीटर क्रॉस कंट्री दौड़ में वीरेन्द्र सिंह ने मात्र 39 मिनट में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वानिकी विषयों की मुख्य परीक्षा में सभी 79 प्रशिक्षणार्थी सफल घोषित हुए। सभी विषयों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अजय राठौर (वनमंडल देवास) को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का सम्मान प्रदान किया गया।
वन संरक्षण को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान
वन विद्यालय संचालक सुधांशु यादव ने नवप्रशिक्षित वनरक्षकों को वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विभागीय दायित्वों के निर्वहन के साथ निरंतर अध्ययन और ज्ञानवृद्धि की आदत ही एक सफल वनरक्षक की पहचान है। कार्यक्रम के अंत में अनुदेशक आदित्य शांडिल्य ने अतिथियों, प्रशिक्षणार्थियों और उनके परिजनों का आभार व्यक्त किया। समारोह में वन विद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


