पिछोर (नीरज गुप्ता)। नगर परिषद पिछोर द्वारा मोती सागर तालाब को जलकुंभी और कचरे से मुक्त कराने के लिए चलाया जा रहा सफाई अभियान अब नए विवादों में घिरता नजर आ रहा है। एक ओर परिषद की पहल से वर्षों से गंदगी और जलकुंभी से पटे तालाब का स्वरूप बदलने लगा है, वहीं दूसरी ओर निकाले गए कचरे के निस्तारण के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा और जलकुंभी निकाली जा रही है, जिससे जलाशय का पानी फिर से दिखाई देने लगा है। लेकिन आरोप है कि निकाले गए कचरे को निर्धारित स्थान पर ले जाकर फेंकने के बजाय तालाब किनारे ही जलाया जा रहा है। रहवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी और सूखे मौसम में खुले स्थान पर कचरा जलाना जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि आग बेकाबू होकर आसपास फैलती है तो जन-धन की हानि से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल बन गया है। स्थानीय पत्रकार नीरज गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में नगर परिषद के सीएमओ से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान कचरा जलाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए फोन काट दिया। हालांकि परिषद का कहना है कि तालाब से निकाला गया कचरा हटाने का कार्य लगातार जारी है। फिलहाल मोती सागर की सफाई से तालाब की तस्वीर बदलती दिख रही है, लेकिन कचरा निस्तारण की प्रक्रिया ने परिषद की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



