माँ जानकी प्रकटोत्सव की शासकीय मान्यता के लिए जानकी सेना का महाअभियान शुरू

MP DARPAN
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*14 चरणों की रणनीति तैयार, मुख्यमंत्री को भेजे जाएंगे 10 हजार मांग-पत्र
*भोपाल में विशाल पदयात्रा और आमरण अनशन की चेतावनी

शिवपुरी। माँ जानकी प्रकटोत्सव को शासकीय मान्यता दिलाने की मांग को लेकर अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना संगठन ने राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान का शंखनाद कर दिया है। संगठन ने 14 चरणों में व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की है, जिसके माध्यम से प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों तक जनभावनाओं को सशक्त रूप से पहुंचाया जाएगा।

शिवपुरी स्थित नक्षत्र गार्डन में आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के मीडिया प्रमुख संजय आजाद ने बताया कि अभियान के प्रथम चरण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 10 हजार मांग-पत्र भेजे जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश और देशभर में जनसंपर्क, पत्रकार वार्ताएं, सामाजिक संगठनों से संवाद तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संगठन के कार्यकर्ता सकल हिंदू समाज के बीच पहुंचकर अभियान के उद्देश्य और महत्व को समझा रहे हैं तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का समर्थन जुटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेने के साथ युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर समर्थन मांगा जा रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसभाओं के माध्यम से इस मांग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। अभियान के तहत देशभर की लगभग 50 इकाइयों के जानकी सैनिक साइकिल यात्राएं निकालते हुए भोपाल पहुंचेंगे। वहीं सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। आंदोलन के अंतिम चरण में राजधानी भोपाल में हजारों जानकी सैनिकों की विशाल पदयात्रा आयोजित होगी। इसके बाद 14 हजार जानकी सैनिकों द्वारा अपने रक्त से लिखे गए ‘रक्तपत्र’ मुख्यमंत्री निवास भेजे जाएंगे। मांग पूरी नहीं होने तक भोपाल में अखंड भूख हड़ताल और आमरण अनशन का भी निर्णय लिया गया है। संगठन के राष्ट्रीय विस्तारक महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक रघुवीर गौर गुरुजी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से अभियान में सहभागी बनने की अपील की है।

चित्रकूट और माँ जानकी के ऐतिहासिक संबंध को बनाया आंदोलन का आधार

राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने कहा कि शिवपुरी से प्रारंभ हुआ यह सांस्कृतिक अभियान केवल एक पर्व की मान्यता का प्रश्न नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या और आदर्श नारी शक्ति की प्रतीक माँ जानकी के सम्मान का विषय है। उन्होंने बताया कि वनवास काल का सबसे लंबा समय प्रभु श्रीराम और माता जानकी ने चित्रकूट की पावन भूमि पर व्यतीत किया था, जिससे मध्यप्रदेश का उनसे गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण के लिए माँ जानकी के आदर्शों का पुनर्स्मरण आवश्यक है। जब तक ‘माँ जानकी प्रकटोत्सव’ को शासकीय मान्यता नहीं मिलती, तब तक यह जनअभियान निरंतर जारी रहेगा।

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