सद्भावना समिति की बैठक में सुरक्षा, यातायात और विसर्जन व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश
शिवपुरी। आगामी गणेश चतुर्थी, डोल ग्यारस और अनंत चतुर्दशी को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सद्भावना एवं समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। अपर जिला मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में कानून-व्यवस्था, यातायात, विद्युत, स्वास्थ्य, स्वच्छता और विसर्जन व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
जर्जर सड़कों की होगी मरम्मत, विसर्जन स्थलों पर रहेंगी सुविधाएं
बैठक में समिति सदस्यों ने कस्टम गेट, सदर बाजार, कोर्ट रोड, राजपुरा रोड और लुहारपुरा सहित विभिन्न मार्गों पर गड्ढों की समस्या उठाई। एडीएम ने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निर्देश दिए कि गणेश प्रतिमाओं के चल समारोह वाले मार्गों का निरीक्षण कर शीघ्र गड्ढों की मरम्मत कराई जाए। 22 से 25 सितंबर तक गणेश विसर्जन के लिए निर्धारित अमोला पुल और गणेश कुंड, जाधव सागर रोड पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, टेंट, कुर्सियां, माइक और क्रेन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित स्थलों के अलावा अन्य स्थानों पर विसर्जन रोकने के लिए शहर में मुनादी भी कराई जाएगी।
डीजे पर नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
त्योहारों के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल में मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन अनिवार्य रहेगा। एसडीएम और एसडीओपी को डीजे एवं बैंड संचालकों की बैठक लेकर समझाइश देने तथा नियम तोड़ने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। विसर्जन स्थलों पर गोताखोर, रस्सी, टॉर्च और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध रहेंगे। कंट्रोल रूम की व्यवस्था तथा विद्युत तारों की ऊंचाई और सुरक्षा की जांच भी कराई जाएगी। स्वास्थ्य केंद्रों पर आकस्मिक चिकित्सा दल तैनात रहेंगे।
प्रशासन की आयोजकों से अपील
प्रशासन ने आयोजकों से अपील की है कि पंडाल पूर्व स्वीकृत स्थानों पर ही लगाए जाएं, पारंपरिक मार्गों से ही चल समारोह निकाले जाएं तथा पंडालों में अग्निशामक यंत्र, रेत-पानी और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आयोजकों को 24 घंटे जिम्मेदार सदस्यों की तैनाती और उनके नाम-नंबर पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। 10 फीट से अधिक ऊंची प्रतिमाएं नहीं बनाने की भी अपील की गई है।


