सिकंदरा बैरियर पर फिर दबंगई: वसूली के विरोध में ड्राइवर से मारपीट, एनएच-27 जाम, 4 अज्ञात पर एफआईआर

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शिवपुरी। दिनारा थाना क्षेत्र स्थित सिकंदरा बैरियर एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां बीती रात वसूली के आरोपों के बीच यात्रियों से भरी बस और ट्रेवलर को रोककर मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। पैसे न देने पर ड्राइवर से बेरहमी से मारपीट की गई, जबकि विरोध करने पर यात्रियों को भी नहीं बख्शा गया। आक्रोशित श्रद्धालुओं ने नेशनल हाईवे-27 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे देर रात तक यातायात बाधित रहा।

जानकारी के अनुसार, राजस्थान से श्रद्धालुओं को लेकर लौट रही बस जैसे ही देर रात करीब 1:30 बजे सिकंदरा बैरियर पहुंची, वहां मौजूद अज्ञात लोगों ने वाहन को रोक लिया और ड्राइवर से 2 हजार रुपए की मांग की। विरोध करने पर ड्राइवर लाखाराम के साथ मारपीट की गई। इसी तरह एक अन्य मामले में नेपाल से लौट रहे यात्रियों की ट्रेवलर को भी रोककर दबंगई दिखाई गई और ड्राइवर के साथ जमकर मारपीट की गई।

विरोध में हाईवे जाम, पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना से गुस्साए यात्रियों ने एनएच-27 पर चक्का जाम कर दिया। सूचना मिलते ही एसडीओपी आयुष जाखड़ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर जाम खुलवाया। हालांकि इस दौरान बैरियर प्रभारी और यात्रियों के बीच तीखी बहस से माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

सेटिंग का आरोप: एक लाख में मामला दबाने की कोशिश!

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बैरियर पर सक्रिय प्राइवेट कटरों ने न केवल वसूली की कोशिश की, बल्कि मामला दबाने के लिए एक लाख रुपए में समझौते की पेशकश भी की। इससे पूरे घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया है।

चार अज्ञात पर मामला दर्ज, जांच शुरू

दिनारा थाना पुलिस ने दोनों घटनाओं को लेकर चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उनकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, हाईवे जाम करने वाले यात्रियों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी वारदात

गौरतलब है कि 8-9 अप्रैल की दरमियानी रात को भी इसी बैरियर पर एक महिला टीएसआई के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी, जिसमें पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

कहां है सिस्टम?

लगातार हो रही घटनाओं ने आरटीओ और चेक पोस्ट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति के चलते बैरियर की कमान प्राइवेट कटरों और दलालों के हाथों में चली गई है। ऐसे में नियम-कायदों की जगह सेटिंग और वसूली का खेल हावी होता नजर आ रहा है।

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