शिवपुरी। जिले के ऐतिहासिक नरवर किले में हुई सनसनीखेज वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था और पुरातत्व संरक्षण दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश किले के पिछले दुर्गम रास्ते से लोडिंग वाहनों के साथ अंदर घुसे और सुरक्षाकर्मियों को जान से मारने की धमकी देकर सिंधिया काल की लगभग 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक तोप लेकर फरार हो गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी गिरोह ने 5 जुलाई को भी तोप को उसके स्थान से नीचे गिराने की कोशिश की थी, लेकिन भारी वजन के कारण उसे ले नहीं जा सका। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई। दस दिन बाद बदमाश पूरी तैयारी के साथ लौटे और वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए। ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि उनके पास सुरक्षा के नाम पर केवल एक डंडा था। न हथियार, न टॉर्च और न ही पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम। हथियारबंद बदमाशों के सामने जान बचाना ही उनकी मजबूरी बन गया। बताया जा रहा है कि नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें अब 13 ही बची हैं। पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर राजचिह्न तथा फारसी-देवनागरी शिलालेख अंकित हैं। ऐतिहासिक महत्व के कारण इनकी कीमत अमूल्य मानी जाती है, जबकि अवैध अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसी धरोहरों की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है। केयरटेकर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की भूमिका की आशंका जताई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 दिन पहले मिले संकेतों के बावजूद सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई और आखिर देश की बेशकीमती धरोहर चोरों के हाथ कैसे लग गई।



